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हरिवंश राय बच्चन – जीवन परिचय, प्रमुख रचनाएं एवं योगदान

हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य के लेखक एवं प्रसिद्ध कवि थे| हिंदी साहित्य में इनकी सबसे प्रसिद्ध कृति मधुशाला है| भारतीय हिंदी सिनेमा जगत के प्रसिद्ध अमिताभ बच्चन के यह पिता हैं| उत्तर छायावाद के प्रमुख कवियों में इनको गिना जाता है| इन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है| तथा भारत सरकार द्वारा इन को पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है|

हरिवंश राय बच्चन का जीवन परिचय | harivansh rai bachchan ka jeevan parichay

हरिवंश राय बच्चन का जन्म उत्तर प्रदेश के (इलाहाबाद) जो अब प्रयागराज के नाम से प्रसिद्ध है, में 1907 ई. में हुआ| इनके पिता का नाम प्रताप नारायण श्रीवास्तव तथा माता का नाम सरस्वती देवी था| इन्होंने काशी और प्रयाग में शिक्षा प्राप्त की| तथा कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से इन्होंने डॉक्टरेट की| कुछ समय ये प्रयाग विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्राध्यापक रहे और फिर दिल्ली स्थित विदेश मन्त्रालय में कार्य किया और वहीं से अवकाश ग्रहण किया|

ये उत्तर छायावादी काल के हालावादी कवि थे| इनकी कविताओं में मानवीय भावनाओं की सामान्य एवं स्वाभाविक अभिव्यक्ति हुई है| सरलता, संगीतात्मकता, प्रवाह और मार्मिकता इनके काव्य की विशेषताएँ हैं और इन्हीं से इनको इतनी अधिक लोकप्रियता प्राप्त हुई| हिंदी साहित्य का या महान लेखक एवं कवि 18 जनवरी, 2003 ई. में इस भौतिक संसार को छोड़कर सदा के लिए विदा हो गया| 

हरिवंश राय बच्चन का साहित्यिक परिचय

आरम्भ में ये, उमर खय्याम के जीवन-दर्शन से बहुत प्रभावित रहे, जिसने इनके जीवन को मस्ती से भर दिया पहली पत्नी की मृत्यु के बाद घोर विषाद और निराशा ने इनके जीवन को घेर लिंया था| इसके स्वर हमको ‘निशा-निमन्त्रण’ और ‘एकान्त संगीत’ में सुनने को मिले, किन्तु ‘सतरंगिणी’ में ‘नीड़ का निर्माण फिर’ किया गया और जीवन का प्याला एक बार पुन: उल्लास और आनन्द के आसव से छलकने लगा|

ये वास्तव में यक्तिवादी कवि रहे| ‘बंगाल का काल’ तथा इसी प्रकार की अन्य रचनाओं में इन्होंने अपने जीवन के बाहर विस्तृत जन-जीवन पर भी दृष्टि डालने का प्रयत्न किया| इन परवर्ती रचनाओं में कुछ नवीन विषय भी उठाये गये और कुछ अनुवाद भी प्रस्तुत किये गये| इनमें कवि की विचारशीलता तथा चिन्तन की प्रधानता रही| इनकी प्रथम कृति ‘तेरा हार’ 1932 ई. में प्रकाशित हुई थी|

हरिवंश राय बच्चन की भाषा शैली

इनकी भाषा सरस सुबोध एवं सरल खड़ी बोली है| इनकी है|नाओं में तत्सम से अधिक तद्भव शब्दों के प्रयोग हैं और शब्द-चयन भाव के अनुसार है| इन्होंने मुक्तक और भावात्मक गीति शैली में अपनी रचनाओं का सृजन किया है| सरलता, स्वाभाविकता, लाक्षणिकता, संगीतात्मकता और प्रवाहमयता इनकी शैली की प्रमुख विशेषताएँ हैं| इनकी रचनाओं में मुख्यतः शृंगार के दोनों भेद तथा करुण रस प्रमुखता से मिलते हैं| इन्होंने छन्दबद्ध और छन्दमुक्त दोनों प्रकार की रचनाएँ की हैं| उपमा, रूपक आदि प्रमुख अलंकारों के प्रयोग इनकी रचनाओं में प्रचुरता से देखने को मिलते हैं| 

साहित्य में स्थान

इनका हिन्दी साहित्य में एक श्रेष्ठ स्थान है| यह एक कवि के साथ-साथ एक लेखक भी थे| अपनी मात्र एक रचना ‘मधुशाला’ से इनका नाम हिन्दी काव्य-साहित्य में अमर हो गया है| बच्चन जी को ‘हालावाद’ के प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है| 

हरिवंश राय बच्चन की प्रमुख रचनाएँ

1) नई से नई-पुरानी से पुरानी

2) बंगाल का काल 

3) खादी के फूल 

4) सूत की माला 

5) मिलन यामिनी 

6) प्रणय पत्रिका 

7) धार के इधर-उधर 

8) आरती और अंगारे 

9) बुद्ध और नाचघर 

10) त्रिभंगिमा 

11) चार खेमे चौंसठ खूंटे 

12) दो चट्टानें 

13) बहुत दिन बीते 

14) कटती प्रतिमाओं की आवाज़ 

15) उभरते प्रतिमानों के रूप 

16) जाल समेटा 

17) हलाहल 

18) तेरा हार 

19) मधुशाला 

20) मधुबाला 

21) मधुकलश 

22) आत्म परिचय 

23) निशा निमंत्रण 

24) एकांत संगीत 

25) आकुल अंतर 

आत्मकथा

1) नीड़ का निर्माण फिर 

2) बसेरे से दूर 

3) क्या भूलूं क्या याद करूं 

4) दशद्वार से सोपान तक 

5) प्रवास की डायरी 

अन्य रचनाएं

1) टूटी छूटी कड़ियाँ 

2) नागर गीता 

3) बच्चन के लोकप्रिय गीत 

4) डब्लू बी यीट्स एंड अकल्टिज़म 

5) मरकत द्वीप का स्वर 

6) हैमलेट 

7) भाषा अपनी भाव पराये 

8) किंग लियर 

9) प्रवास की डायरी 

10) खय्याम की मधुशाला 

11) सोपान 

12) मैकबेथ 

13) जनगीता 

14) ओथेलो 

15) उमर खय्याम की रुबाइयाँ 

16) कवियों में सौम्य संत: पंत 

17) आज के लोकप्रिय हिन्दी कवि: सुमित्रानंदन पंत 

18) आधुनिक कवि 

हरिवंश राय बच्चन पुस्तकें

इन्होंने अनेक पुस्तकें लिखे हैं| इनमें उनके द्वारा किए गए शोध रचनावली एवं आलोचना शामिल है| इन्होंने रचनावली के नौ खण्ड लिखे हैं| जिसका संपादन अजीत कुमार द्वारा किया गया है| इनकी अन्य उल्लेखनीय पुस्तकें हैं जैसे – गुरुवर बच्चन से दूर तथा मधुकलश इनकी प्रमुख पुस्तकों में से एक है|

संक्षिप्त परिचय

• जन्म स्थान – प्रयाग (इलाहाबाद) उत्तर प्रदेश

• जन्म – 8 जनवरी, 1907 ई. 

• पिता – प्रताप नारायण श्रीवास्तव 

• माता – सरस्वती देवी 

• पुत्र – अमिताभ बच्चन

• भाषा – खड़ी बोली 

• शैली – भावात्मक गीत शैली 

• रचनाएँ-मधुशाला, मधुबाला, निशा निमन्त्रण, प्रणय-पत्रिका, क्या भूलूँ क्या याद करूँ, आरती और अंगारे तथा आकुल अन्तर 

• मृत्यु – 18 जनवरी, 2003 ई. 

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